1990काम नया था।
नाम भरोसे से
बनाना था।
1990 में रविंदर कुमार ने RK Optical के नाम से इस सफ़र की शुरुआत की। काम को समझना, ग्राहक की बात ध्यान से सुनना और उसकी ज़रूरत के मुताबिक सही सलाह देना—उनके लिए कारोबार का यही तरीका था। ग्राहक दोबारा आए, तो अपने पिछले अनुभव के भरोसे आए।
चश्मे के काम में आपकी सलाह का असर ग्राहक हर दिन महसूस करता है। इसलिए यहाँ साख बातों से नहीं, काम से बनती है। उन्हीं शुरुआती वर्षों में परिवार ने यह बात सीखी: किसी की नज़र से जुड़ा काम है, तो ज़िम्मेदारी भी उतनी ही अपनी समझनी होगी।
कंपनी का नाम बाद में आया। पहले लोगों का भरोसा कमाया।


